मध्यमेश्वर : कब जाएं, कैसे जाएं, आस-पास के घूमने के स्थान

 मध्यमेश्वर : कब जाएं, कैसे जाएं,  आस-पास के घूमने के स्थान


इन्हें मनमहेश्वर या मदनमहेश्वर भी कहा जाता हैं। इन्हें पंच केदार में दूसरा माना जाता है। यह ऊषीमठ से 18 मील दूरी पर है। यहां महिषरूपधारी भगवान शिव की नाभि लिंग रूप में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने अपनी मधुचंद्र रात्रि यही पर मनाई थी। यहां के जल की कुछ बूंदे ही मोक्ष के लिए पर्याप्त मानी जाती है।

कब जाएं : मध्यमेश्वर मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय गर्मी का माना जाता है। मुख्यतह यहां की यात्रा मई से अक्टूबर के बीच की जाती है।

कैसे जाएं : उखीमठ से सबसे पास का हरिद्वार या ऋषिकेश रेल्वे स्टेशन है। उखीमठ से उनीअना जाकर, वहां से मध्यमेश्वर की यात्रा की जाती है। सड़क मार्ग द्वारा हरिद्वार या ऋषिकेश से बस द्वारा जा सकते हैं।  नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून है।


मध्यमेश्वर के आस-पास के घूमने के स्थान :


बूढ़ा मध्यमेश्वर : मध्यमेश्वर से 2 कि.मी. दूर बूढ़ा मध्यमेश्वर नामक दर्शनीय स्थल है।

कंचनी ताल : मध्यमेश्वर से 16 कि.मी. दूर कंचनी ताल नामक झील है। यह झील समुद्री सतह से 4200 मी. की ऊचाई पर स्थित हैं।
गउन्धर : यह मध्यमेश्वर गंगा और मरकंगा गंगा का संगम स्थल है।

टिप्पणियाँ